Saturday, 13 July 2019

वर्ष का पंद्रहवां रविवार, हिंदी प्रवचन, 14, जुलाई 2019


विधिविवरण ग्रन्थ ३०:१०-१४ 
कोलोसियों :१५-२० 
लुकस १०:२५-३७ 

किसी दिन एक व्यक्ति प्रभु येसु के पास आता और उनसे पूछता है कि अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए उसको क्या करना चाहिए। प्रभु यह जानकर कि वह शास्त्री याने यहूदी धर्मग्रंथ का ज्ञाता हैउससे पूछते हैं कि धर्मग्रंथ क्या कहता है। यहूदियों के धर्मग्रंथ तौराह में तकरीबन 613 आज्ञायें है लेकिन वह शास्त्री बडी ही चतुराई से उन सारी आज्ञाओं का सार सिर्फ दो आज्ञाओं में समेटते हुवे कहता है अपने प्रभु ईश्वर को अपने सारे हृदयसारी आत्मा सारी शक्ति और सारी बुद्धी से प्यार करो और अपने पडोसी को अपने समान प्यार करो।*प्रभु ने कहा तुम अनन्त जीवन का रास्ता जानते होयही करो और तुम जीवन प्राप्त करोगे। अपने प्रश्न की सार्थकता दिखलाने के लिए उसने ईसा से कहालेकिन मेरा पडोसी कौन हैऔर प्रभु उसे भले समारी का सुन्दर दृष्टान्त सुनाते हैं। हम सब इस कहानी से भली-भाँति परिचित हैं।
 यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो ईश्वर की दृष्टि में सही  भला कार्य करता है। वह अपने जीवन में ईश्वर की दया और प्रेम को चरितार्थ करता हैउसे जीता है। मेरा पडोसी कौन है इसके तीन सम्भावित उत्तर यह कहानी हमें देती है। 
     पहला उत्तर उन डाकुओं की ओर से आता है उनके लिए अपने परिवार  घर कुटम्ब से बाहर 
रहने वालाअपने बगल में रहने वालाया फिर 
कोई मुसाफिर एक पडोसी नहीं था उनके जीवन का दर्शन यही है कि वे किस प्रकार से दूसरों को लूटेउनसे माल हडप लें, उनकी चीजों को हथिया लें। उनकी स्वार्थपुर्ति में पीडित का क्या हाल होता है उसकी उनको परवाह नहीं 
किसी  किसी रूप में ऐसी मानसिकता बहुत सारे लोगों की होती है। अपने बल, रोब
सामाजिक  राजनैतिक धाक के बल पर वे गरीब  कमजोर तबके के लोगों कोअपना निशाना बनाते हैं। और उनका आर्थिकसामाजिक  शारीरिक शौषण करते हैं।

प्रश्न का दूसरा जवाब आता है  लेवी  याजक के व्यवहार से। जब उन्होंने   उस के बारे में  कुछ नहीं सोच पाये उन्हें सिर्फ अपनी ही चिंता थी। कहीं लूटेरे वापस आकर उन पर धावा बोल दे तोऔर क्या पता पीडित व्यक्ति जिंदा भी है कि मर गया ह? उनके धार्मिक  कानून के मुताबिक ये दोनों पुजारी तबके के व्यक्ति यदि किसी मृत शरीर का स्पर्श कर लेते तो वे अशुद्ध माने जाते,और उन्हें प्रभु के मंदिर में सेवा करने से सात दिन तक के लिए वंचित किया जाता(गणना ग्रंथ 19:11) उन्होंने अपने धार्मिक कर्तव्य को प्रेम  दया के काम से ऊपर माना। हम मेसे अधिकतर इस वर्ग में आते हैं। हम यहीं असफल हो जाते हैं। हमारी इच्छा तो होती है कि हम लोगों की भलाई  उनकी मदद करने आगे बढें पर हमारे सामने हजारों सवाल खडे हो जाते हैं। किसी का ऐक्सिडेंट हुंआ हैरोड पर पडा है, पर रिस्क वाली बात है
पुलिस केस है, कौन लफडे में पडे, इतनी भीड खडी है कोई भी तो कुछ नहीं कर रहा हैतो मैं क्यों आफत मौल लूँ। 

मेरा पडोसी कौन है इस सवाल का जवाब हमारे जीवन में एक स्वार्थि रूप ले लेता है। 
 डर हमारा सबसे बडा दुशमन है इस परिस्थिति में प्यार का विपरीत नफरत 
नहीं अपितु डर है। जहाँ सच्चा प्यार है वहाँ कोई डर नहीं। (‘प्रेम में भय नहीं होता। पूर्ण प्रेम भय दूर कर देता हैक्योकि भय में दंड की आशंका रहती है और जो डरता है, उसका प्रेम  पूर्णता तक  नहीं पहुँचा है’’  (योहन 4:19) जहाँ प्यार वहाँ भय  शंका गायब हो जाती है और हम हिम्मत  साहस के साथ बोलने  जोखिम उठाने के लिए योग्य बन जाते हैं। 

जिस रोड से वह व्यक्ति जा रहा था वो येरिखो 
रोड था। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका एक सुनसान घाटी वाला इलाका था और उसमें इस प्रकार की वारदात होना स्वाभिविक था। वहाँ आये दिन इस प्रकार की घटनायें हुआ करती थी।

ख्रीस्त में प्यारे भाईयों और बहनों हम सभी येरीखो से येरूसालेम की ओर यात्रा कर रहे हैं। इस येरिखो  रोड पर हम भी कई प्रकार के मुसाफिरों से मिलते हैं। दुःखित, पीडित, व्यथितनिराश, हताश, परेशानगरीब, निःस्सहायऔर लाचार।येरिखो रोड से गुज़रते समय हम इन की ओर किस निगाह से देखते हैं? उन लुटेरों की निगाह से कि हम किस तरह से उनकी नादानी  
कमज़ोरी का फायदा उठा सकें  अपने स्वार्थ की पूर्ति कर सकें? या फिर उस लेवी  याजक की तरह जिनकी रोजी रोटी पक्की थी, जिन्होंने कभी गरीबी का अनुभव नहीं किया थावे कतरा के चले जाते हैं। उन्हें दया  सेवा से बढकर अपनी पवित्रता  धार्मिक प्रपंच  कायदे कानून ज्यादा प्रिय थे या फिर हम उस भले समारी की तरह व्यवहार करते हैं जिसकी समाज में कोई हैसियत नहीं थीजिन्हें यहूदी लोग हीनता की दृष्टी से देखते थे। जिसने अपनी जाती  बिरादरी की परवाह किये बिनाएक जोखिम भरा काम किया उसके दिल में दया  प्रेम की जो भावना उमड रही थी उसकी तुलना में जो जोखिम वो उठा रहा था वह नगण्य थी। उसे दया दिखाने  सेवा करने के सिवा कुछ और नज़र ही नहीं  रहा था। 

संत मदर तेरेसा के जीवन  का एक वाकिया है जो कि एक भली पडोसन थी उन सब लोगों की जो कलकत्ता की गलियों में तडप रहे थे उन्होंने वहाँ किसी गरीब भिखारी अनाथ अथवा दलीत को नहीं परन्तु स्वयं प्रभु येसु को तडपते देखा 
उनकी सेवा करने के लिए उन्हें कोई भी नहीं रोक सका। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगेकहीं ये घायल व्यक्ति मर गया तो मेरे माथे आयेगा। आदि।

आज का यह दृष्टाँत एक ओर जहाँ उन लोगों पर एक गहरा प्रहार है जो दूसरों के दुख कष्टों पर ध्यान नहीं देते  उनके प्रति उदासिनता देखाते हैं वहीं दूसरी ओर यह हम सब को ‘पिता ईश्वर  जैसे दयालु बनने (लूकस 6:36)के लिए एक खुला निमंत्रण है। हम दुःखितों  पीडितों को 
उदारतादयालुत,कोमलता  सौम्यता भरे  हृदय से  प्यार करने के लिए बुलाये गये हैं। येरिखो जाने वाला रोड कहीं ओर नहीं हमारे घर के सापने से ही जाता हैवह हमारे घर में भी हो 
सकता हैहमारे परिवार में भी हो सकता है। जहाँ-जहाँ दुःखित मानवता कराहती है वहाँ-वहाँ यरिखो रोड है। यदि मेरा भाई दुःखित है तो वह येरिखो रोड पर है, यदि मेरे वृद्ध दादा-दादी पीडित है तो वे येरिखो रोड पर हैंयदि मेरी माँ परेशान हैतो वह येरिखो रोड पर हैयदि मेरे बच्चे बिमार हैंपरेशन हैं निराश हैं हताश हैं तो वे येरिखो रोड पर हैंयदि मेरे पिताजी रोजी रोटी की जुगाड में मशक्कत कर रहे हैं दर-दर भटक रहे हैं तो वे येरिखो रोड पर हैं।
क्या मैं मेरे आस-पास येरिखो रोड पर दुखितव्यथित इन लोगों के छोटे-बडे दुख कष्टों की ओर ध्यान देता हूँ? उनके दुःखों को परेशानियों को हल्का करने करने का प्रयास करता हूँ?या फिर मैं उस याजक  लेवी की तरह अपनी दुनिया में मस्त हुवे फिरता रहता हूँ।
संत पापा फ्रांसिस कहते हैं कि आज की दुनिया में उदासीनता की संस्कृति पनपती जा रही है। (Culture of indefference)

 हम लोगों के दुखों में शामिल होना नहीं चाहते क्योंकि हम सुरक्षित रहना चाहते हैं। आईये हम प्रभु से प्रार्थना करें कि वह हमें पिता ईशवर के समान दयालू बनना सिखायें।  

 
आमेन

Jay Yesu. 


Kindly help me to reach the Word of God to more people by sharing the reflections to maximum people. I have done my part. now its your turn. Thank you. 


Have a blessed Sunday. 


Friday, 5 July 2019

वर्ष का चौदहवाँ रविवार (वर्ष स) Hindi Homily 7 July 2019



इसा. 66:10-14

गलातियो 6:14:18

लूकस 10:1-12. 17-20

पीछले रविवार को हमने बुलाहट के विषय में मनन चिंतन किया था। इसी संदर्भ में आज के सुसमाचार में प्रभु 70 शिष्यों को दो-दो करके भेजते हैं जहाँ वे स्वयं जाने वाले थे। (लुक 10:1) वे उनसे कहते हैं - ‘‘फसल तो बहुत है पर मज़दूर थोडे ही हैं, इसलिए फसल के स्वामी से विनती करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मज़दूरों को भेजे।’’ फसल बहुत ज़्यादा है, सारा संसार एक फसल का खेत है; गिने-चुने परिवार अथवा देश नहीं। संत मारकुस के सुसमाचार में प्रभु कहते हैं ‘‘संसार के कोने-कोने में जाकर सारी सृष्टि को सुसमाचार सुनाओ’’ (मार्क 16:51) केवल इंसान ही नहीं सारी सृष्टि को प्रभु की मुक्ति की ज़रूरत है। संत पौलुस कहते हैं कि समस्त सृष्टि प्रभु के लिए कराह रही है। (रोम 8:22)।
‘‘फसल बहुत अधिक है;’’ इसलिए हमारे मानवीय तर्क के अनुसार तो प्रभु को यह कहना चाहिए था कि तुरन्त खेत में जाओ और काम शुरू करो। पर प्रभु हमसे कहते हैं - ‘‘फसल के स्वामी से विनती (प्रार्थना) करो कि वह अपनी दाखबारी में मज़दूरों को भेजे।’’ फसल प्रभु की है। प्रभु स्वयं ही अपनी दाखबारी में काम करने वाले मजदूरों को बुलाते हैं। स्वर्ग राज्य प्रभु की कृपा से स्थापित किया जाता है। कलीसिया इस बात से भलीभाँति वाकिफ़ है और वह इसकी पुरजोर घोषणा करती है कि प्रार्थना व ईश - राज्य के फैलाव में एक गहरा संबध है; प्रार्थना और मनपरिर्वन, प्रार्थना व हृदय परिवर्तन, प्रार्थना व जीवन परिवर्तन, प्रार्थना व ईश वचन की घोषणा व लोगों द्वारा उसे स्वीकार करने में एक गहरा संबंध है। यदि कोई अच्छा प्रवचन देता हो, प्रभु के वचन सुनाता हो पर वो प्रार्थना में प्रभु से नहीं जुडता हो तो उसका काम, उसकी मेहनत फल उत्पन्न नहीं करेगी। वचन कहता है - ’’जिस तरह दाखलता में रहे बिना डाली स्वयं नहीं फल सकती, उसी प्रकार मुझमें रहे बिना तुम भी नहीं फल सकते’’ (योहन 15:)।

प्रभु हमें भेडियों के बीच भेडों की तरह भेजते हैं (लूक 10:3)। ‘‘मैं तुम्हें भेडों की तरह भेजता हूँ’’ यह एक बहुत ही मर्मस्पर्शी चित्रण है। कभी न कभी हम मेसे हर कोई ने डिस्कवरी चैनल देखा ही होगा। उसमें भेड बकरियों का शिकार करते हुए हाइना व भेडियों को आपने ज़रूर देखा होगा। कल्पना कीजिए उस क्षण की जब वह बेचारी भेड हाइना अथवा भेडियों के झूंड में अकेली फंस जाती है। और वे खुंखार शिकारी जानवर अपने ताँत पीसते हुए उस पर झपट पडने के लिए उतावले हो रहे होते हैं। उस बेचारी भेड की मनोस्थिति की कल्पना कीजिए, जिसे अपनी मौत सामने नज़र आती है। हम सब उसी भेड की भाँति इस दुनिया में भेजे गये हैं। हम शेर, चीता अथवा टाइगर बनकर अपना रोब जमाने और दुनिया पर शासन करने नहीं बल्कि दुनिया की सेवा में अपना जीवन अर्पित करने के लिए बुलाये गये हैं। हम इसलिए बुलाए गये हैं कि हम सेवक बनकर पूरी दुनिया को प्रभु के पास ला सकें। सारी सृष्टि को प्रभु के राज्य में मिला सकें। इसके लिए हमें भेडियों के बीच भेडों जैसा बनना पडेगा।  

प्रभु येसु स्वयं भेडियों की बीच एक निर्दोष मेमने के रूप  में पिता के द्वारा भेजे गये थे। लेकिन वे भेडियों के द्वारा पराजित नहीं हुए। प्रकाशना ग्रंथ अध्याय 5: 9 में हम इस बलित मेमने के विषय में सुनते हैं कि स्वर्ग में संतगण इनकी महिमा का गीत गाते हुए कहते हैं- तू पुस्तक खोलने योग्य है, क्योंकि तेरा वध किया गया है। तूने अपना रक्त बहा कर ईश्वर लिए प्रत्येक वंश, भाषा, प्रजाती और राष्ट्र से मनुष्यों को खरीद लिया है।  और आगे वचन कहता है - लाखों करोडों की संख्या में दूतगण एक स्वर से ये गा रहे हैं - ‘‘बलि चढाया हुआ मेमना, सामथ्र्य, वैभव, प्रज्ञा, शक्ति, सम्मान, महिमा तथा स्तुति का अधिकारी है’’ (वचन12)। इसलिए प्रभु येसु एक पराजित नहीं विजयीमान मेमना है। जिसने सारे संसार पर विजय प्राप्त की है। वे हमसे कहते हैं - ‘‘संसार में तुम्हें क्लेष सहना पडेगा। परन्तु ढारस रखो मैंने संसार पर विजय पायी है’’ (योहन 16:33)।

इसलिए भेडें बनकर जीना, विनम्रता, दया, प्रेम और करूणाभरा जीवन जीना कोई कायरता व कमज़ोरी की बात नहीं। यह हमारी ताकत है, हम इसी से विजय प्राप्त करते हैं। हम लाठी, तलवार अथवा बुन्दुक से नहीं पर प्रभु येसु के द्वारा दिखाए गये विनम्रता, प्रेम दया व क्षमा के मार्ग पर चलकर ही दुनिया पर विजय प्राप्त करते हैं। यही है परमेश्वर का राज्य; शाँति, भाईचारे व प्रेम का राज्य। भेड बनकर जीने में जो ताकत है वह भेडिया बनकर नहीं हासिल की जा सकती। बडे-बडे राजा महाराजाओं व शासकों ने ( जैसे- सिकंदरमहान, हिटलर आदि) अपने राजकीय व सैन्य बल से दुनिया को फतह करने की सोची थी।  लेकिन आज वे बस इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह गये हैं। 

परन्तु मदर तेरेसा जिसने दीन-हीन मेमने की राहों पर चलकर स्वयं उस मसीहा की दया व करूणा प्रतिमुर्ति बनकर जीवन जिया।  वे कुछ ही दिनों बाद संत घोषित की जाने वाली है । सारी दुनिया उन्हें अब संत कहकर पुकारेगी। सारी दुनिया उनके नाम पर श्रद्धा के साथ सर झूकायेगी।  वे विजयी मेमने की स्र्वीय सेना सम्मिलित हो गयी है।  इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कई खुंखार भेडियों का सामना करना पडा। लेकिन वो बलीत मेमने प्रभु येसु मसीह के द्वारा दिखाए मार्ग पर नित चलती रही। वे हमेषा ही एक निर्भक, कर्मठ व विनम्र भेड समान बनी रही।

 उनकी विनम्रता व सहनश्क्ति का एक किस्सा आप लोगों ने सुना ही होगा। किसी दिन वे अपने अनाथ व बीमार बच्चों के लिए भिक्षा मांगने गई। उन्होंने किसी महाजन के सामने अपने हाथ पसारे तो उसने मदर की हथेली पर थूक दिया। मदर ने उसे पोंछ कर फिर अपना हाथ उनकी ओर बढाया और कहा ये तो आपने मेरे लिए दिया अब मेरे बच्चों के लिए भी कुछ दे दीजिए। इस पर उस आदमी का दिल पानी-पानी हो गया। वह खुद को शर्मिंदा  महसूस करने लगा। और तब से मदर के सेवाकार्य में अपना हाथ बंटाने लगा। 

ख्रीस्त में प्यारे भाईयों और बहनों इसे ही कहते हैं भेडियों के बीच भेड बनकर जीना।
आईये हम हमारी इस ख्रीस्तीय बुलाहट को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रभु सेआशिष व कृपा माँगे।

आमेन ।